Vidyut Jammwal does his own action scenes | विद्युत जामवाल अपने एक्शन सीन खुद करते हैं: डायरेक्टर आदित्य बोले- एंकल टूटने के बाद भी विद्युत ने तीन दिनों तक फिल्माए एक्शन सीन

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3 घंटे पहलेलेखक: उमेश कुमार उपाध्याय

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हाल में विद्युत जामवाल, अर्जुन रामपाल, नोरा फतेही, एमी जैक्सन स्टारर फिल्म ‘क्रैक- जीतेगा… तो जिएगा’ का टीजर लॉन्च हुआ। एक्सट्रीम स्पोर्ट्स जोनर की इस फिल्म के डायरेक्टर आदित्य दत्त हैं। फिल्म की 90 पर्सेंट शूटिंग पोलैंड और 10 पर्सेंट मुंबई में हुई है। स्टार्स और कुत्ते-भेड़िए के साथ शूट हुई इस एक्शन फिल्म की मेकिंग आदि के बारे में डायरेक्टर आदित्य दत्त ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत की। पेश हैं बातचीत के प्रमुख अंश :

‘कमांडो-3’ के सेट पर विद्युत को सुनाया था ‘क्रैक’ का आइडिया
साल 2019 में विद्युत जामवाल के साथ ‘कमांडो-3’ शूट कर रहा था, उस समय ‘क्रैक- जीतेगा… तो जिएगा’ का आइडिया विद्युत के साथ शेयर किया था। विद्युत को कहानी का आइडिया बेहद पसंद आया था। उन्होंने कहा कि इसे साथ मिलकर बनाते हैं। वहां से बात शुरू हुई और हमने स्क्रिप्ट लिखी। इस आइडिया को डेवलप करते-करते लॉकडाउन लग गया। उस दौरान इस फिल्म की स्क्रिप्ट पर काम शुरू कर दिया था। तकरीबन दो-तीन साल इसकी स्क्रिप्ट लिखने में लग गए।

एक्शन को नए जोन के अंदर लेकर जाना था, क्योंकि यह फिल्म लीगल एक्सट्रीम स्पोर्ट्स पर आधारित है। इसमें अपनी जान दांव पर लगाने वाला खेल है, इसलिए फिल्म का नाम ‘क्रैक- जीतेगा… तो जिएगा’ रखा है। यह गेम के अंदर का बहुत बड़ा रूल है। इसमें साइकिलिंग, स्केटिंग, माउंटेन क्लाइंबिंग, स्काई डाईविंग आदि ऑटोमेटिक एक्सट्रीम स्पोर्ट्स की चीजें दिखेंगी। इसमें मार-धाड़ कम और एक्सट्रीम स्पोर्ट्स की दुनिया ज्यादा है।

फिल्म की कहानी मुंबई स्थित धारावी स्लम एरिया की है। आजकल के यूथ बेहद एडवेंचरस हैं। कभी कोई बिल्डिंग पर चढ़ जाते हैं, तो कभी कोई बाइक आउट करते हैं- यह कहानी उनमें से एक है। एक वेब साइट होती है, जहां पर एक सीन में दांव लगाकर यह गेम खेला जाता है।

मुंबई और पोलैंड में हुई शूटिंग
इस फिल्म का ज्यादातर हिस्सा पोलैंड में और कुछ हिस्सा मुंबई में शूट किया गया है। यह मुंबई और पोलैंड की कहानी है। यह 90 पर्सेंट पोलैंड की फिल्म है। दरअसल कहानी मुंबई से शुरू होती है और फिर पोलैंड जाती है। मेरे हिसाब से फिल्म 67 से 70 दिनों में शूट की गई है। ‘क्रैक’ के पोस्ट प्रोडक्शन पर अभी काम चल रहा है। जल्द ही समय पर रिलीज के लिए फिल्म तैयार हो जाएगी।

फिल्म में कुत्ते और भेड़िए दिखाई देंगे
फिल्म में कुत्ते और भेड़िए, दोनों मिक्स हैं। कुत्ते और भेड़िए को पोलैंड में ट्रेन किया है। वहां पर इनकी ट्रेनिंग में दो महीने का वक्त लगा। उसके बाद फिल्म शूट की गई। भेड़िए और कुत्तों को मिलाकर फिल्म में तकरीबन 200 जानवर इस्तेमाल किए गए हैं। जानवरों को हैंडल करना काफी मुश्किल काम होता है। अब्रॉड में एक आदमी दस-दस, बीस-बीस जानवरों को हैंडल करता है। इसमें जानवरों की शूटिंग बड़े प्लानिंग के साथ की गई है। उनके साथ दो-तीन घंटे से ऊपर शूट नहीं कर सकते। यह सब रिस्ट्रिक्शन रहते हैं। उस प्रोटोकॉल के हिसाब से हमने भी शूट किया।

एक्शन सीन के लिए स्टार्स को दो महीने की ट्रेनिंग दिलाई गई थी
फिल्म में काम करने वाले स्टार्स को काफी ट्रेनिंग दिलाई गई है। कम से कम दो से तीन महीने इनकी ट्रेनिंग में लगे होंगे। टीजर में जानवरों के साथ एक्शन सीन है, पारकर, साइकिलिंग, स्पीड कंट्रोल, जंपिंग आदि काफी सारी चीजों की ट्रेनिंग दी गई है। ऐसी फिल्म शूट करने के लिए एक्टर, डायरेक्टर सहित पूरे क्रू मेंबर को फिजिकल स्ट्रेंथ की जरूरत होती है। इसमें ऐसा ड्रामा सीन नहीं होता कि एक्टर आए और परफॉर्म करके चले गए।

जब हम एक्शन सीन शूट कर रहे थे, तब सच में लोग भाग रहे थे, इधर से उधर कूद रहे थे, उसके लिए फिजिकल स्ट्रेंथ की जरूरत थी। इसी वजह से सबने दो-दो महीने एक्शन ट्रेनिंग से लेकर हैंड फाइट की ट्रेनिंग और रिहर्सल की है। ये सब मुंबई से शुरू जरूर हो गया था, लेकिन हम लोग फिल्म की शूटिंग से एक महीना पहले पोलैंड में पहुंचे थे। वहीं पर सब ने ट्रेनिंग ली।

विद्युत ने अपने एक्शन सींस खुद किए हैं
विद्युत जामवाल अपने एक्शन के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अपने सारे एक्शन सींस खुद किए हैं। अगर उनको बताया जाता था कि कोई सीन अनसेफ है, तो इस पर वे कहते थे कि मैं इसके लिए ही जाना जाता हूं। ये मेरा टैलेंट है। उनका मानना है कि अगर कोई सीन एक स्टंटमैन कर सकता है, तब मैं भी कर सकता हूं। अगर वह करने वाला है, तब उससे अच्छा मैं ही अपना शॉट कर लूं। बड़े पर्दे पर अपने दर्शकों और फैंस को जो रियल दिखाने में मजा है, वह डुप्लीकेट में कहां हैं। कहानी लिखने के दौरान स्टार के चेहरे सामने आते रहते हैं। अर्जुन रामपाल टैलेंटेड और सीनियर एक्टर हैं। नोरा फतेही अपनी डांस के लिए जानी जाती हैं, पर बहुत टैलेंटेड एक्ट्रेस हैं। नोरा फतेही और एमी जैक्सन इस कहानी की दुनिया की दो महत्वपूर्ण पार्ट हैं। दोनों ने अपने रोल को बड़े बखूबी तरीके से निभाया है।

टूटे एंकल के साथ विद्युत ने फिल्माया एक्शन सीन
यह किस्सा शूटिंग के बीच का है। शूटिंग के तीन दिन पहले रिहर्सल के दौरान विद्युत के एंकल में गहरी चोट लग गई थी। हम लोगों को शूट करना ही था, क्योंकि फॉरेनर की क्रू मेंबर आदि सारे लोग आ चुके थे। उनको वापस भेज नहीं सकते थे। ऊपर से साइकिलिंग का शॉट था। यह कुल चार दिनों की शूटिंग थी। लेकिन विद्युत ने चार दिनों तक एंकल टूटे होने का अहसास तक नहीं कराया। उन्होंने कभी नहीं कहा कि यह शॉट ऐसे मत लो या फिर ऐसा कुछ कर लो। वे सेट पर ऐसे आते थे, जैसे उन्हें कुछ हुआ ही नहीं हो। उन्होंने बतौर डायरेक्टर मुझे कभी झिझक नहीं फील कराया। उनका कहना था कि जो भी करो, ठीक से करो, क्योंकि यह एक्शन सीक्वेंस एक ही दफा होने वाला है। यह सीक्वेंस एकदम सही होना चाहिए। इसकी पूरी क्रेडिट विद्युत को दूंगा।

फिल्म मेकिंग की अन्य रोचक बातें
फिल्म की प्री-प्रोडक्शन की तैयारी में 9 महीने लग गए। बस्ती, ट्रेन आदि का सेट लगाया। बाकी 90 पर्सेंट रियल लोकेशन पर शूट किया गया। फिल्म को ऐसे लोकेशन पर शूट करना था, जो ज्यादा एक्सपोज ना हुआ हो, इसलिए पोलैंड में वह लोकेशन ढूंढ़ा, जहां बॉलीवुड फिल्में शूट नहीं की गई हैं।

फिल्म में नए लोकेशन देखने को मिलेंगे। फिल्म शूट करने के दौरान पोलैंड में 5 से 6 डिग्री तापमान होता था, जबकि सीन के मुताबिक जैकेट वगैरह नहीं पहन सकते थे। इसलिए कई बार इतने ठंड में शूट करना काफी चैलेंजिंग हो जाता था। इसके बावजूद सारे एक्टर्स और पूरी टीम की तरफ से एक्स्ट्रा सपोर्ट मिला है। यह मेरे लिए सबसे यादगार बात होगी।

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