ग्रे मार्केट में IPO के स्टॉक्स का प्रीमियम, Flair की स्क्रिप्ट में ट्विस्ट और इंडियन WeWork की कहानी

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Tata Technologies के स्टॉक्स शेयर बाजार पर रिकॉर्ड प्रीमियम पर लिस्ट हुए। ओपन होने से पहले इस इश्यू को लेकर कुछ एक्सपर्ट्स ने संदेह जताया था। ऐसे भी मामले दिखे जब एक ही फंड हाउस में एक्सपर्ट्स की राय इस इश्यू को लेकर अलग-अलग थी, क्योंकि माना गया कि इसमें शेयरों की वैल्यूएशन कम नहीं थी। IPO से करीब 1.5-2 महीने पहले टाटा टेक्नोलॉजीज के स्टॉक्स TPG Rise Climate SF को 20 फीसदी डिस्काउंट पर एलॉट किए जाने की खबर से इनवेस्टर्स का उत्साह और ठंडा पड़ गया। लेकिन, शेयरों की शानदार लिस्टिंग के बाद पूरी कहानी बदल गई। एक्सपर्ट्स ने कहना शुरू कर दिया कि ग्रे मार्केट के प्राइस ने स्टॉक्स में अच्छी सेफ्टी मार्जिन के संकेत दिए थे। ग्रे मार्केट में ट्रेडिंग करने वाले लोग कौन हैं? ग्रे मार्केट में ट्रेडिंग वॉल्यूम कितना होता है? ग्रे मार्केट में किसी स्टॉक की कीमत कैसे तय होती है? ये ऐसे सवाल हैं जो रहस्य की तरह हैं। दलाल स्ट्रीट के एल्गो जॉबर के चीफ शुक्ववार को कुछ देर के लिए दिखे और डील में अच्छा प्रॉफिट बनाया।

ग्रे मार्केट में ट्विस्ट

टाटा टेक्नोलॉजीज और गंधार ऑयल की शानदार लिस्टिंग के बाद 30 नवंबर को ग्रे मार्केट में Flair के स्टॉक की कीमतों में उछाल दिखा। इससे कई इनवेस्टर्स को लगा कि 1 दिसंबर को शेयरों की लिस्टिंग पर उसमें अपर सर्किट लगेगा। लेकिन, स्टॉक की कीमतें में ज्यादा उछाल नहीं दिखा। हालांकि, यह 304 रुपये के इश्यू प्राइस के मुकाबले 48 फीसदी के उछाल के साथ 451 रुपये पर क्लोज हुआ। जो ट्रेडर्स इस स्टॉक को बेचकर निकलना चाहते थे वे इंट्रा डे सर्किट की वजह से ऐसा नहीं कर सके। इंट्रा डे सर्किट फिल्टर लिमिट 10 फीसदी तय था, जबकि आम तौर पर लिस्टिंग के दिन यह 20 फीसदी होता है। यह हर उस व्यक्ति के लिए सबक है जो इस बात में भरोसा रखता है कि ग्रे मार्केट प्रीमियम एक तरह की सेफ्टी देता है।

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पांच महीनों में पैसा दोगुना

EFC(1) के स्टॉक्स में पिछले महीने जबर्दस्त उछाल आया। कुछ बड़े निवेशकों की एंट्री से इस तेजी को और हवा मिली। इनमें कुछ हाई प्रोफाइल इनवेस्टर्स हैं जिन्हें प्रिफरेंशियल एलॉटमेंट रूट के जरिए शेयरों का एलॉटमेंट हुआ। इस साल की शुरुआत में भी कंपनी ने कुछ प्रिफरेंशियल एलॉटमेंट किए थे। ऐसा लगता है कि इनमें से कुछ शुरुआती इनवेस्टर्स थोड़े समय में अच्छा प्रॉफिट बनाने के बाद अब स्टॉक्स से बाहर निकल रहे हैं। पांच महीनों से कम समय में पैसे दोगुना हो जाने पर ऐसा कौन नहीं करना चाहेगा? पिछले कुछ समय से यह स्टॉक ट्रेड-टू-ट्रेड कैटेगरी में है। लेकिन, इसका असर बुल्स के उत्साह पर नहीं पड़ा है। 1990 के दशक के अंत में दलाल स्ट्रीट पर पिंक पैंथर का बड़ा असर होता था। बताया जाता है कि उसने भी इस स्टॉक में दिलचस्पी दिखाई है। स्टॉक के चियरलीडर्स इसे इंडिया के WeWork के रूप में देख रहे हैं। ऐसा न हो तो अच्छा है।

Amara Raja में अमीर निवेशकों की दिलचस्पी

1 दिसंबर को Amara Raja & Mobility के स्टॉक्स में असाधारण वॉल्यूम देखने को मिला। पिछले महीने इस स्टॉक में 25 फीसदी से ज्यादा तेजी आई। बताया जाता है कि कुछ अमीर निवेशकों ने इस स्टॉक में पॉजिशन बनाया है। यह तब हुआ था जब एक विदेशी संस्थागत बिकवाल और कुछ घरेलू म्यूचुअल फंड्स के बीच जुलाई में सौदे होने की खबर आई थी। उसके कई हफ्तों बाद तक इस स्टॉक का प्रदर्शन कमजोर था। अब चर्चा है कि कुछ अमीर निवेशक सक्रिय हो गए हैं।

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