अब किसलिए माफी मांग रहे हैं मनोज मुंतशिर? ‘आदिपुरुष’ के बाद विवादों में राइटर, बोले- ‘जहां राम का जन्म…’

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मुंबई. साल 2019 में आई फिल्म ‘केसरी’ के ‘तेरी मिट्टी’ सॉन्ग और ‘बाहुबली’ के डायलॉग लिखने के बाद मनोज मुंतशिर (Manoj Muntashir) रातों-रात स्टार बने. लेकिन इस साल रिलीज हुई फिल्म ‘आदिपुरुष’ के लिए डायलॉग लिख विवादों में खड़े हो गए थे. इसके बाद से उन्हें खूब ट्रोल किया गया. उनके खिलाफ विरोध-प्रदर्शन हुए. कई केस दर्ज हुए. अपने बयानों से ‘आदिपुरुष’ पर विवाद खड़ा करने के लगभग 6 महीने बाद मनोज ने ‘आदिपुरुष’ (Adipurush) के लिए लिखे अपने डायलॉग्स के लिए माफी मांगी है. भारतेंदु नाट्य अकादमी में शनिवार शाम को ‘सबमें बसे सो राम कहाये’ विषय पर कार्यक्रम में बोलते हुए मुंतशिर ने कहा,”वो सरफिरी आंधी थी, संभालना पड़ा, मैं आखिरी चिराग था, जलना पड़ा.”

मनोज मुंतशिर ने सार्वजनिक तौर फर एक बार फिर माफी मांगी. उन्होंने कहा, ”उस गलती के लिए माफी मांगने के लिए यूपी की राजधानी लखनऊ से बेहतर कोई जगह नहीं है, जहां राम का जन्म हुआ था. यह वो भूमि जहां मेरे लेखन की स्याही और खून है. पूरी विनम्रता के साथ, मैं स्वीकार करता हूं कि भले ही हमारे इरादे नेक थे, हम बहक गए और हमें यह एहसास नहीं हुआ कि लोग इसे अच्छा नहीं मानेंगे.”

गीतकार मनोज मुंतशिर ने फिर दी सफाई, बोले- ‘आदिपुरुष की कहानी लिखने में 100% गलती हुई, लेकिन मुझे उस समय…’

मनोज मुंतशिर ने दावा किया कि एक लेखक के रूप में, उनके हाथ स्क्रिप्ट से बंधे हुए थे, जिससे उन्हें सुधार के लिए बहुत कम जगह मिलती थी. उन्होंने फिल्म के डायरेक्टर और प्रोड्यूसर का बचाव किया और कहा, ”रिलीज के दो दिनों के भीतर, हमने सुनिश्चित किया कि हमने अपनी गलतियां सुधार लीं.”

रातों-रात बदले ‘आदिपुरुष’ के 10 हजार प्रिंटः मनोज मुंतशिर

मनोज मुंतशिर ने दावा किया, “हमने डायलॉग्स को दोबारा लिखा और आपत्तिजनक डायलॉग्स को बदल दिया. रातों-रात 10,000 प्रिंट बदल दिए गए.” मुंतशिर ने कहा कि गीत लेखन फीका हो गया है. हालांकि, उन्होंने कहा कि कुछ लेखक अभी भी आनंद बख्शी, मजरूह सुल्तानपुरी, साहिर लुधियानवी और कैफ़ी आज़मी की विरासत को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

‘पहली फिल्म के गीत लिखने का क्रेडिट सही समय पर नहीं मिला’

मनोज मुंतशिर ने कहा, ”यही कारण है कि मुझे अपना पहला फिल्मी गीत लिखने और उचित जगह पाने में एक दशक से अधिक का समय लग गया. मैं लखनऊ की विरासत के साथ विश्वासघात नहीं कर सकता, जो एक उपजाऊ मिट्टी रही है, जिसने जाने-माने कलाकारों, लेखकों और साहित्यिक हस्तियों को जन्म दिया है. मैं कुछ ऐसा लिखना चाहता था, जिससे मेरी धरती को गर्व महसूस हो.”

Tags: Manoj Muntashir

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