Main Atal Hoon fame Pankaj Tripathi Interview, says he is scared of prosthetic after this film | अटल बायोपिक के बाद प्रोस्थेटिक से पंकज ने बनाई दूरी: बोले- दो घंटे में नाक लगती थी, फिर उसे लगाकर 12 घंटे शूट करता था

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7 मिनट पहले

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पंकज त्रिपाठी स्टारर फिल्म ‘मैं अटल हूं‌’ 19 जनवरी को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। इस बायोपिक में पंकज, देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के रोल में नजर आएंगे। दैनिक भास्कर से हुई खास बातचीत में पंकज ने बताया कि उन्होंंने इस किरदार के लिए किस तरह से मेहनत की और कैसे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के किरदार को आत्मसात किया। पढ़िए उनसे हुई बातचीत के कुछ मुख्य अंश…

'मैं अटल हूं' की कहानी रवि जाधव ने लिखी है। इसे डायरेक्ट भी उन्होंने ही किया है। यह 19 जनवरी को रिलीज होगी।

‘मैं अटल हूं’ की कहानी रवि जाधव ने लिखी है। इसे डायरेक्ट भी उन्होंने ही किया है। यह 19 जनवरी को रिलीज होगी।

‘मैं अटल हूं’ जैसी फिल्में कितनी जिम्मेदारी देती हैं?
एक तो यह बायोपिक है। ऊपर से अटल जी जैसे राजनेता और देश के पूर्व प्रधानमंत्री पर बेस्ड है तो इसमें किसी प्रकार की फिक्शनल राइटिंग हो ही नहीं सकती। उनके जीवन के किस क्षण को उठाकर स्क्रिप्ट में डालें और किसे नहीं, यह एक राइटर और डायरेक्टर के लिए बड़ा ही चैलेंजिंग काम था। 80 साल के जीवन से हर अहम चीज को उठाना बड़ा मुश्किल हो जाता है। वैसे तो मैं एक एक्टर हूं और मेरा काम सिर्फ एक्टिंग करना था तो मेरे पास यही एक चुनौती थी कि मैं उनकी मिमिक्री करूं या नहीं?

मैं दुविधा में था। इसकी एक वजह यह भी थी कि मुझे मिमिक्री आती ही नहीं। दूसरा मुझे लगा कि अगर किसी को अटल जी की मिमिक्री ही देखनी होगी तो वह यू-ट्यूब पर देख लेगा। हमें तो उनकी कहानी दिखानी थी, उनका व्यक्तित्व दिखाना था और उनका विचार दिखाना था। सो, मैंने उसी हिसाब से काम किया।

इसे करते वक्त डायरेक्टर रिचर्ड एटनबरो की ‘गांधी’ और ‘लिंकन’ जैसी फिल्में जेहन में थीं?
नहीं, पहली बात तो मैंने वो फिल्में देखी नहीं है। ‘गांधी’ फिल्म के कुछ सीन जरूर देखे हैं पर मैं हर फिल्म और हर एक किरदार में फ्रेश अप्रोच रखता हूं। जानता हूं कि यह अच्छी बात नहीं पर फिर भी मैं ज्यादा फिल्में नहीं देखता। मेरी इंस्पिरेशन सिनेमा नहीं है बल्कि जीवन है। सिनेमा देखकर एक्टिंग के लिए इंस्पायर नहीं हो सकता। जीवन देखकर जरूर हो सकता हूं।

पंकज को साल 2023 में फिल्म 'मिमी' के लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला है। इससे पहले 2018 में 'न्यूटन' के लिए उन्हें स्पेशल मेंशन कैटेगरी में नेशनल अवॉर्ड मिला था।

पंकज को साल 2023 में फिल्म ‘मिमी’ के लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला है। इससे पहले 2018 में ‘न्यूटन’ के लिए उन्हें स्पेशल मेंशन कैटेगरी में नेशनल अवॉर्ड मिला था।

क्या यह किसी बायोपिक के लिए उल्टी अप्रोच है या नई अप्रोच है?
मैं कहूंगा कि ये नई नहीं बल्कि मौलिक अप्रोच है। मैं देखता हूं कि मैनरिज्म का अमाउंट कितना हो और उस व्यक्ति का व्यक्तित्व और विचार कितना हो। ये वहीं मूर्त-अमूर्त की बात है कि आकार खत्म हो जाता है पर विचार खत्म नहीं होता। आप साउंड को भी ग्राफिक के माध्यम से देख सकते हैं लेकिन विचार और मूर्त को नहीं। ये ऐसा है कि किसी शर्ट को पहनकर मुझे तो अच्छा लग रहा है। लेकिन जो मैं महसूस कर रहा हूं वह आपको कैसे महसूस कराऊं?

अटल जी से जुड़े कितने राजनेताओं से उनके बारे में इनपुट लिए?
फिल्म में बहुत कुछ है। जाहिर सी बात है कि दो घंटे में इतनी बड़ी शख्सियत के जीवन को दिखाना पाना मुश्किल है। मैं जितने भी राजनैतिक और ब्यूरोक्रेट्स से मिला हूं। हर आदमी के पास अटल जी से जुड़े 5 से 10 किस्से होते ही हैं और वो सभी रोचक भी हैं। वो कहते हैं कि इसे भी फिल्म में डाल देना। अब व्यक्तित्व विशाल है तो सब कुछ दिखा पाना संभव नहीं है।

बाकी रवि जाधव जी ने किया है काफी कुछ रिसर्च तो हम तो बस उनके दिशा-निर्देशों पर ही चले हैं। बाकी लिखा हुआ मटेरियल और उनके इंटरव्यूज हैं। मेकर्स ने ज्यादातर मटेरियल वहीं से उठाया है। मैंने भी अटल जी के बारे में बहुत पढ़ा है। रिसर्च भी की है। अब तो मैं खुद अटल जी पर एक किताब लिख सकता हूं। हम फिल्म में संक्षिप्त रूप से अटल जी की सोच लोगों तक पहुंचा दें, बस वही हमारे लिए सफलता होगी।

'मैं अटल हूं' का फर्स्ट लुक पिछले साल अटल जी के 98वें बर्थडे पर रिलीज हुआ था। इसमें पंकज के अलावा पियूष मिश्रा और दया शंकर पांडे जैसे कलाकार भी नजर आएंगे।

‘मैं अटल हूं’ का फर्स्ट लुक पिछले साल अटल जी के 98वें बर्थडे पर रिलीज हुआ था। इसमें पंकज के अलावा पियूष मिश्रा और दया शंकर पांडे जैसे कलाकार भी नजर आएंगे।

फिल्म के लिए आप प्रोस्थेटिक प्रोसेस से भी गुजरे। क्या अनुभव रहा?
प्रोस्थेटिक प्रोसेस इस पूरी फिल्म का सबसे पेनफुल पार्ट था। मेकअप के दौरान दो घंटे तो मेरी नाक लगाने में ही चले जाते थे। फिर उसी नाक को लगाकर 10 से 12 घंटे शूट करना पड़ता था। लखनऊ में शूटिंग चल रही थी और टेम्प्रेचर 45 डिग्री तक रहता था। प्रोस्थेटिक में पसीना, खुजली क्या नहीं होता था, फिर भी मैं उस पीड़ा को फेस करते हुए काम करता रहा। इतनी तकलीफ के बाद भी आपको चेहरे पर एक सुखद भाव रखना है। कई बार आपकी बॉडी भी आपका साथ नहीं दे रही है पर फिर भी लगे हुए हैं। बस इतना समझ लीजिए कि अब आगे अगर किसी फिल्म के लिए मुझे प्रोस्थेटिक प्रोसेस से गुजरना पड़ा तो मैं उसे करने से पहले 10 बार सोचूंगा।

एक कवि अटल जी और राजनेता में क्या डिफरेंस महसूस किया?
हमारी फिल्म में पोएटिक सुर है। वह ट्रेलर में कम महसूस हो रहा है लेकिन जब दर्शक फिल्म देखेंगे तो पाएंगे कि हमने इसमें अटल जी का कवि स्वरूप बहुत सही ठंग से यूज किया है। ये कहानी एक कवि अटल जी की है दो राजनेता थे। एक सीन है फिल्म में जो शायद एडिट हो गया है जिसमें अटल जी कहते हैं कि मैं चाहता हूं कि लोग मुझे कवि के रूप में याद करें।

पिछले साल पंकज की तीन फिल्में रिलीज हुईं। इसमें 'OMG 3', 'फुकरे 3' और 'कड़क सिंह' तीनों ने ही अच्छा परफॉर्म किया।

पिछले साल पंकज की तीन फिल्में रिलीज हुईं। इसमें ‘OMG 3’, ‘फुकरे 3’ और ‘कड़क सिंह’ तीनों ने ही अच्छा परफॉर्म किया।

क्या ‘मैं अटल हूं’ को अब तक का सबसे मुश्किल रोल कहेंगे?
हां, यह मेरा सबसे टफ किरदार रहा क्योंकि ये रियल पर्सन की लाइफ पर बेस्ड है। इस किरदार को मैं सिर्फ कल्पना के साथ नहीं कर सकता था। कहानी में भी, परफॉर्मेंस है लेकिन हमें यह भी ध्यान रखना था कि ये नाट्य रूपांतरण है। हम सिर्फ री-क्रिएट कर रहे हैं। बाकी तो फिर मैं आलोचनाओं को जस का तस लेने के लिए तैयार हूं। आप मुझे ना-पसंद कर सकते हैं पर मैं फिर भी आपको पसंद करता रहूंगा।

वो कौन सी चीजों हैं जिन्हें आपने लक फैक्टर के तौर पर संभालकर रखा है?
खाट और बाइक के अलावा कई चीजें हैं। वो सारे रिश्ते जो मेरे जीवन जुड़े हुए हैं। वह टीचर, वह गार्ड और वो सब लोग जो मुझसे जुड़े हुए हैं। जिस भी व्यक्ति का मेरे जीवन में थोड़ा भी योगदान है सब मेरे लिए लकी फैक्टर हैं। जैसे अभी हाल ही में मैं मार्या होटल गया था तो वहां योगेश मेरा दोस्त है जो सबसे लोअर स्टाफ में काम करता है। वो आज भी पर्मानेंट नहीं है। वह मेरे दिल के बेहद करीब है। पिता जी का देहांत हुआ था तब वह मेरे गांव आया था।

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