बचपन में बीड़ी बेच पाला परिवार का पेट, फिर कलम से फूटी क्रांति, और राज कपूर से लेकर देवानंद ने कलमकार के आगे झुकाया सिर

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संसद टीवी को दिए एक पुराने इंटरव्यू में नीरज बताते हैं, ‘मेरे मास्टर ने कहा कि नीरज तुम गरीब के बेटे हो, मैं तुम्हें पास नहीं करूंगा, लेकिन मैं तुम्हारी फीस भर दूंगा. तुम गरीब के बेटे हो, जो भी जिंदगी में करना फर्स्टक्लास करना.’ ये नसीहत नीरज ने गांठ बांध ली और फिर कभी भी मीडियोक्रेसी को सेलिब्रेट नहीं किया. 10वीं कक्षा प्रथम स्थान पास की और आगे बढ़ गए. बचपन से ही गरीबी और गमों से समुंदर ने उन्हें कविता के नजदीक ला दिया. नीरज ने 17 साल की उम्र से ही कवि सम्मेलनों में हिस्सा लेना शुरू कर दिया था. देखते ही देखते नीरज चोटी के कवि बन गए. नीरज भी पैसे कमाने की चाह लिए मुंबई पहुंचे और फिल्मों में गाना लिखना शुरू कर दिया. (फोटो साभार-Instagram)

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