Hanuman became Dara Singh at the age of 62 | 62 की उम्र में हनुमान बने थे दारा सिंह: 72 किलो वजनी लक्ष्मण को कंधों पर उठा लिया था, खुद सुनील लहरी ने किया खुलासा

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9 मिनट पहले

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सुनील लहरी ने दारा सिंह के बारे में कुछ दिलचस्प बातें बताई हैं। उन्होंने बताया कि दारा सिंह ने 62 साल की उम्र में 70 किलो वजनी सुनील लहरी को अपने कंधों पर उठा लिया था। इसके लिए उन्होंने मेज का भी इस्तेमाल नहीं किया था।

बता दें, टीवी शो रामायण में सुनील लहरी को लक्ष्मण और दारा सिंह को हनुमान के रोल में देखा गया था।

दारा सिंह हमेशा से प्रेरणा रहे हैं- सुनील लहरी

न्यूज 18 को दिए इंटरव्यू में सुनील लहरी ने टीवी शो रामायण की शूटिंग के कुछ किस्से शेयर किए। उन्होंने कहा, ‘रामायण में एक सीन में दारा सिंह को मुझे कंधों पर उठाना था। उस वक्त मैं 70 किलो का था। ऐसे में मैंने उनसे कहा कि हम इस सीन की शूटिंग के लिए स्टूल का इस्तेमाल कर लेते हैं और बाद में इसे एडिटिंग में कट कर देंगे। मगर उन्होंने ऐसा करने से मना कर दिया।

सोचिए, 62 साल की उम्र में कई लोग ढंग से चल भी नहीं पाते हैं। वहीं, दारा सिंह ने मुझे अपने कंधों पर उठा लिया था। उनसे बहुत प्रेरणा मिलती है। मैं बचपन से ही उनसे बहुत प्रभावित रहता हूं। उनके साथ शूटिंग करना एक अद्भुत एक्सपीरियंस था।

रामायण के सेट पर हुआ था मजेदार किस्सा

सुनील लहरी ने सेट से जुड़ा एक दूसरा भी मजेदार वाक्या शेयर किया। उन्होंने कहा, ‘एक दिन शूटिंग के वक्त, मुझे बैठने के लिए कुर्सी दी गई थी और दारा सिंह को स्टूल दिया गया था। मैं उनका बहुत सम्मान करता था, ऐसे में मैंने उन्हें अपनी कुर्सी बैठने के लिए ऑफर की। जब मैंने उन्हें कुर्सी ऑफर की तो पहले तो उन्होंने मना कर दिया। मगर, जब मैंने दोबारा ऑफर की, तो उन्होंने कहा- ओए, तेनु पता नहीं कि मेरी पूछ लगी हुई है। मैं कुर्सी पर बैठ नहीं सकता हूं।

जब रामायण प्रसारित होता, तब सड़कों पर सन्नाटा छा जाता

टीवी शो रामायण को रामानंद सागर ने बनाया था। सीरियल में अरुण गोविल ने राम, दीपिका चिखलिया ने सीता, अरविंद त्रिवेदी ने रावण, सुनील लहरी ने लक्ष्मण और दारा सिंह ने हनुमान का किरदार निभाया था। रामायण दूरदर्शन पर पहली बार 25 जनवरी 1987 को प्रसारित हुआ था। इसका आखिरी एपिसोड 31 जुलाई 1988 को प्रसारित हुआ था। इस सीरियल में कुल 87 एपिसोड थे।

सीरियल की पॉपुलैरिटी इतनी बढ़ गई कि जब भी ये टीवी पर आता तो हर जगह सन्नाटा छा जाता था। घरों के बाहर कर्फ्यू जैसे हालात हो जाते थे। खुद रामानंद सागर को विश्वास नहीं हुआ था कि उनका बनाया सीरियल इतना ऐतिहासिक हो जाएगा।

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