Films were not made to please any party ‘Sajayat’ Sandeep Singh said – After Atal ji, films will be made on Nehru and Osho | ‘किसी पार्टी को खुश करने के लिए फिल्में नहीं बनाता’: प्रोड्यूसर संदीप सिंह बोले- अटल जी के बाद पंडित नेहरू और ओशो पर फिल्म बनाऊंगा

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9 मिनट पहलेलेखक: उमेश कुमार उपाध्याय

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प्रोड्यूसर संदीप सिंह पर हमेशा से इल्जाम लगते आया है कि वो अपनी फिल्मों के जरिए सत्ताधारी दल बीजेपी को सपोर्ट करते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री पर बनी फिल्म पीएम नरेंद्र मोदी बनाई थी। हालांकि संदीप का कहना है कि वो किसी भी पार्टी के लिए काम नहीं करते हैं। उन्हें देश के महान लोगों की कहानी पर्दे पर दिखाना पसंद है। इसी कड़ी में अब वो पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन पर बनी फिल्म ‘मैं अटल हूं’ लेकर आ रहे हैं। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी पर प्रकाशित एक किताब और पब्लिक डोमेन से चीजों को लेकर फिल्म ‘मैं अटल हूं’ बनी है।

19 जनवरी को रिलीज होने जा रही इस फिल्म से लोगों को पता चलेगा कि एक आर्टिस्ट भी नेता बन सकता है। उनके जीवन के बारे में जानकर लोग प्रोत्साहित होंगे। देखते हैं कि अटल जी के जीवन का लोगों पर कितना असर पड़ता है।’ यह कहना है- ‘मैं अटल हूं’ के प्रोड्यूसर संदीप सिंह का। दैनिक भास्कर से एक्सक्लूसिव बातचीत में उन्होंने फिल्म से जुड़ी तमाम बातों से पर्दा उठाया।

पहले ‘अटल’ टाइटल सोचा था, फिर ‘मैं अटल हूं’ को फाइनल किया
संदीप सिंह ने कहा- पहले सोचा था कि फिल्म का टाइटल ‘अटल’ रखेंगे। लेकिन ऐसा लगा कि सिर्फ ‘अटल’ लिखना थोड़ा अपमानित लगता है, क्योंकि अटल जी प्रतिष्ठित इंसान थे। फिर सोचा कि ऐसा नाम दिया जाए, जिसे लोग अपना मानें। फिर ‘मैं अटल हूं’ नाम सामने आया।

अटल जी की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए बनी है फिल्म
‘अटल जी के बचपन, परवरिश, आरएसएस की ट्रेनिंग, उनकी सोच, व्यक्तित्व, उनकी कविताएं, पड़ोसी मुल्क, विपक्ष, लड़ाई, प्रेम और लोगों के लिए उनकी भावनाएं क्या हैं, इन्हीं चीजों को ध्यान में रखते हुए यह फिल्म बनाई गई है। फिल्म में अटल जी का रोल पंकज त्रिपाठी और अटल जी के पिता की भूमिका पीयूष मिश्रा ने निभाया है। फिल्म में और भी कई कलाकार हैं।’

रिसर्च के लिए 7 से 8 लोगों की टीम बनाई गई
‘फिल्म की स्टोरी रिसर्च के लिए 7 से 8 लोगों को टीम बनाई गई थी। ये सभी लोग अटल जी से संबंधित लोगों से मिलने, अखबारों से खबरें निकालने, साइट से जानकारी हासिल करने से लेकर बलरामपुर तक गए। फिल्म में उनकी कविताओं को भी शामिल किया गया है। फिल्म में जो पहला गाना रखा गया है, वो अटल जी का लिखा हुआ है। इसे सलीम-सुलेमान ने कंपोज किया और सोनू निगम ने गाया है। फिल्म में कुल पांच गाने हैं। सीन के मुताबिक कभी देश, कभी प्रेम, कभी दुख की बातों को गाने के जरिए बताया गया है।’

पंकज त्रिपाठी ने लुक, पर्सनैलिटी, आवाज और लहजा अच्छे से पकड़ा
‘सच कहूं तो अटल जी के रोल के लिए पहली पसंद पंकज त्रिपाठी ही थे। उनके अलावा किसी के बारे में सोच ही नहीं सकते थे। अगर वे मना कर देते, तब शायद फिल्म भी नहीं बन पाती। पंकज जी को भी अटल जी से बहुत प्यार है। यह पहली फिल्म है, जिसकी स्क्रिप्ट सुने बगैर उन्होंने हां बोल दिया। वे मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं।

उन्होंने मुझ पर भरोसा किया, उसके लिए धन्यवाद। पंकज जी खुद अटल जी पर कई किताबें खरीदकर पढ़ने से लेकर उनके भाषण और कविताओं का वीडियो देखते थे। उन्होंने कम से कम एक साल तक उनके बारे में ऑब्जर्व किया, उसके बाद शूटिंग पर आए। उस समय किसी फिल्म के लिए पंकज जी ने वजन बढ़ाया था, इसलिए ‘मैं अटल हूं’ के समय उन्होंने खाना कम कर दिया था। खिचड़ी, दही और छाछ जैसा हल्का भोजन ही लेते थे और 15-15 घंटे शूटिंग करते थे।’

मुंबई में 10 से 12 दिन और बाकी शूटिंग बाहर हुई
‘फिल्म की शूटिंग का शेड्यूल 60 दिनों का रहा। मुंबई, लखनऊ, बलरामपुर, कानपुर और दिल्ली जैसे लोकेशन पर फिल्म शूट की गई है। 10 से 12 दिन मुंबई और बाकी शूटिंग बाहर के लोकेशन पर की गई। मुझे अभी तक जितना पता चला है कि फिल्म 2000 स्क्रीन पर रिलीज हो रही है। हालांकि, फिल्म को अभी सेंसर बोर्ड से सर्टिफिकेट नहीं मिला है।’

अटल जी पर आज तक फिल्म नहीं बनी, ये आश्चर्य की बात
‘मैं आश्चर्य में था कि इतने सालों से कोई फिल्ममेकर ने अटल जी पर फिल्म बनाने के बारे में क्यों नहीं सोचा। मेरी कंपनी का नाम ही लीजेंड स्टूडियो है। नाम के मुताबिक मैंने ‘अलीगढ़’, ‘सरबजीत’, ‘भूमि’, ‘झुंड’, ‘पीएम मोदी’ और ‘सफेद’ जैसी फिल्म बनाई हैं और अब ‘मैं अटल हूं’ और ‘स्वतंत्र वीर सावरकर’ जैसी फिल्में लेकर आ रहा हूं।

देखिए, अटल जी जिंदगी कविताओं से भरी थी, जो उन्होंने लिखी थी। किताब का राइट्स खरीदा। उसके बाद दो साल तक रिसर्च किया। फिर फिल्म बनाने का प्रोसेस शुरू किया।’

किसी पार्टी के लिए नहीं, बल्कि वक्त और नाम के मुताबिक फिल्में बनाता हूं
‘एक वक्त ‘दीवार’, ‘त्रिशूल’, ‘राम लखन’, ‘साजन’, ‘दिल है कि मानता नहीं’ जैसी फिल्में चल रही थीं। अब वक्त ‘पुष्पा’ और ‘कांतारा’ जैसी फिल्मों का है। हर चीज का एक वक्त आता है और यह वक्त सच्चाई का है।

बतौर फिल्ममेकर मुझे लगता है कि ‘हीरोपंती’, ‘गणपत’, ‘रानीगंज’, ‘बड़े मियां छोटे मियां’ जैसी फिल्में बनाने की मुझे जरूरत नहीं है, क्योंकि ऑलरेडी ‘वॉर’, ‘पठान’ जवान जैसी फिल्में लोग देख ही रहे हैं। लोग ऐसा सोचते हैं कि मैं बीजेपी के लिए फिल्म बना रहा हूं, पर मैं किसी पार्टी के लिए नहीं, बल्कि नाम के मुताबिक प्रेरणा भरी फिल्में बनाता हूं, जिसे बनाने में बहुत तकलीफ होती है। अब इसे लोग कुछ भी समझें। यह एक पार्टी की फिल्म नहीं, एक इंसान की फिल्म है।’

जवाहरलाल नेहरू, ओशो, माइकल जैक्सन पर फिल्म बनाना चाहता हूं
‘सरदार वल्लभभाई पटेल पर फिल्म बन चुकी है। मैं प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की कहानी कहने के लिए तैयार हूं, पर इस वक्त नेहरू जी की लाइफ के राइट्स मिलना मुश्किल है। अगर किसी के पास राइट्स है, तब प्लीज मुझे अप्रोच करें।

मैं ओशो पर फिल्म बनाना चाहता हूं। मुझे ऐसा लगता है कि वह आदमी समय से आगे था। उनकी सोच, वाणी और विजन बहुत अलग था, जिसने इतने सारे लोगों को अलग तरीके से अपनाया। जिस तरह से उनका जाना हुआ और जिस तरह से लोग इतने वर्षों बाद उनसे जुड़े हुए हैं, उनमें बहुत सारी बातें हैं। इसे इंटरव्यू में नहीं, पर फिल्म के जरिए जरूर कहना चाहूंगा।

माइकल जैक्सन और लता मंगेशकर जी पर फिल्म बनाना चाहूंगा। लता दीदी ने जो स्टेज बनाया है, उसी पर इंडस्ट्री खड़ी है। माइकल जैक्सन के जीवन की कहानियां बड़ी इंट्रेस्टिंग हैं। उन्हें आज भी बरेली, मुरादाबाद से लेकर कान्स और न्यूयॉर्क तक, हर इंसान जानता है। उन्हें सोशल मीडिया की जरूरत नहीं थी।’

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