Filmmaker Neeraj Pandey Birthday Special | 9वीं कक्षा में फेल…इंग्लिश लिटरेचर में हासिल की डिग्री, पहली ही फिल्म से मचाया तहलका

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19 घंटे पहले

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बॉलीवुड डायरेक्टर नीरज पांडे आज 50 साल के हो गए हैं। नीरज अपनी थ्रिलर फिल्मों के लिए जाने जाते हैं। 2008 में उन्होंने फिल्म ‘ए वेडनसडे’से अपने करियर की शुरुआत की जिसमें नसीरुद्दीन शाह और अनुपम खेर लीड रोल में थे.इस फिल्म के निर्देशन के लिए नीरज को बेस्ट डायरेक्टर का नेशनल अवॉर्ड भी मिला था। इसके बाद उन्होंने स्पेशल 26, ‘एमएस धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी’, ‘अय्यारी’, ‘ऑपरेशन रोमियो’, ‘रुस्तम’जैसी फिल्में बनाकर अपनी पहचान बनाई।

इन दिनों नीरज अपनी वेब सीरीज ‘द फ्रीलांसर’ को लेकर चर्चे में हैं जिसमे मोहित रैना बतौर लीड नजर आ रहे हैं। नीरज के लिए इस वेबसीरीज की शूटिंग बेहद चैलेंजिंग थी क्योंकि उन्होंने इसकी शूटिंग कोविड के दौरान की थी नीरज की लाइफ के दिलचस्प फैक्ट्स के साथ-साथ नजर डालते हैं उनके फिल्मी सफर पर…

दैनिक भास्कर को दिए एक इंटरव्यू में नीरज ने वेबसीरीज फ्रीलांसर की कोविड के दौरान शूटिंग के बारे में कहा, ‘कोविड का समय था, आप इमेजिन करो कि आप इस तरह की स्केल का प्रोजेक्ट जो है, जो मांग करता है कि क्रू जो है वह यहां से ट्रैवल करें। वह भी मोरक्को जैसे देश में और मोरक्को में भी हम तीन-चार जगह पर ट्रेवल कर रहे थे। कोविड को लेकर एयरलाइंस से लेकर हर एक मुल्क का अपना एक प्रोटोकॉल था।

सबसे बड़ा चैलेंज चाहिए था कि आप इतना बड़ा और इतना लंबा शेड्यूल, आप अपने क्रू को प्रोटेक्ट करके और एग्जीक्यूट कर पाएं। यह अपने आप में सबसे बड़ा चैलेंज था। इस तरह के प्रोजेक्ट में बहुत सारे लॉजिस्टिक होते हैं जिसमें बहुत सारे इक्विपमेंट, हार्डवेयर प्रॉप्स होते हैं, गन होते हैं, इन सबको हमको यूरोप के कई देशों से लेना पड़ता है, हायर करना पड़ता है खरीदना पड़ता है। तो उन सबके लॉजिस्टिक का अपने आप में हमारे लिए एक नाइटमेयर था।’

नीरज का जन्म हावड़ा, वेस्ट बंगाल में हुआ था. नीरज के पिता बिहार के आरा जिले के रहने वाले थे और हावड़ा में स्थित जर्मन कंपनी बोस्च में काम करते थे। बचपन से ही नीरज को कहानियों, कविता और शायरी में रुचि थी.नीरज हावड़ा में बड़े हुए जहां उन्होंने अपनी 10वीं तक की पढ़ाई सेंट अलोयसियस हाई स्कूल से की। इसके बाद नीरज ने सेंट थॉमस हाई स्कूल, दासनगर से 12वीं पास की और अपनी आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली चले गए।

दिल्ली विश्वविद्यालय के अरविंदो कॉलेज से उन्होंने अंग्रेजी साहित्य में अपनी ग्रेजुएशन पूरी की। पढ़ाई ख़त्म होने के बाद, नीरज ने टेलीविजन प्रोग्राम बनाने वाली कंपनी – लिगेसी एंटरटेनमेंट ज्वाइन की, जहां उन्होंने फिल्मों और फिल्म प्रोडक्शन के बारे में बेसिक बातें सीखीं। इसके बाद नीरज ने 2002 में मुंबई का रुख किया।

नौवीं कक्षा में फेल हो गए थे

एक इंटरव्यू में नीरज ने कहा था,हर कोई जानता था कि बचपन में मुझे कहानियां पसंद थी। मैं पढ़ाई में बहुत खराब था। इसलिए अंग्रेजी साहित्य को छोड़कर, मुझे बाकी सभी विषयों से नफरत थी। मैं गणित और विज्ञान में बहुत बुरा था। मैं नौवीं कक्षा में फेल हो गया, मुझे पढ़ाई में कोई दिलचस्पी नहीं थी।

मेरे पिता इस बात पर बहुत जोर दे रहे थे कि मैं अपनी पढ़ाई पूरी करूं और मेरी एकमात्र शर्त यह थी कि मैं ग्रेजुएशन तभी कर सकता हूं जब मैं अंग्रेजी साहित्य से पढ़ाई करूंगा। इसलिए मैंने 1992 में कलकत्ता छोड़ दिया और दिल्ली चला गया और वहां (श्री अरबिंदो कॉलेज से) अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की।

2008 में बनी पहली फिल्म ‘ए वेडनसडे’ रही सुपरहिट

ग्रेजुएशन के बाद, नीरज ने अपनी एक दोस्त, शीतल भाटिया के साथ मिलकर अपना खुद का प्रोडक्शन हाउस – क्वार्टर इंच प्रोडक्शंस शुरू किया। दोनों ने फ्राइडे फिल्मवर्क्स नाम से एक और कंपनी बनाई, जो उनकी पहली फिल्म ‘ए वेडनसडे’ के निर्माताओं में से एक थी। 2008 में रिलीज हुई इस फिल्म में अनुपम खेर और नसीरुद्दीन शाह ने मुख्य भूमिका निभाई थी और यह पूरे भारत में जबरदस्त हिट रही थी।

कम प्रमोशन के बावजूद, क्रिटिककी प्रशंसा और पॉजिटिव वर्ड ऑफ़ माउथ के कारण यह बॉक्स ऑफिस पर सफल रही। नीरज पांडे की लिखी इस फिल्म को बाद में तमिल में ‘उन्नीपोल ओरुवन’ और तेलुगु में ‘ईनाडु’ के नाम से बनाया गया, दोनों में नसीरुद्दीन शाह की भूमिका में कमल हासन थे।

‘ए वेडनसडे’ में बड़े एक्टर्स का दबदबा नहीं था: नीरज

अपनी पहली फिल्म की सफलता पर नीरज कहते हैं, ‘मैंने अपने करियर की शुरुआत ‘ए वेडनसडे’ से की थी, जिसमें बड़े एक्टर्स नहीं थे। लेकिन इसमें अनुपम खेर, नसीरुद्दीन शाह और जिमी शेरगिल जैसे महान कलाकार थे। मैं हमेशा मानता हूं कि कंटेंट महत्वपूर्ण है और ‘ए वेडनसडे’ की सफलता से यह विश्वास और मजबूत हुआ। ये फिल्म हमें उस रास्ते पर ले गई, जहां हम मुख्य रूप से कंटेंट पर ध्यान देते हैं और अच्छे एक्टर्स अपनी एक्टिंग से इसे स्पेशल बना देते हैं।’

2 हफ्ते बाद मैं मुंबई लौटा तो फिल्म का रिव्यू देखकर मेरे चेहरे पर मुस्कान थी: नीरज

एक इंटरव्यू में नीरज अपनी पहली फिल्म रिलीज से जुडी एक दिलचस्प किस्सा बताया। फिल्ममेकर की माने फिल्म रिलीज के दो हफ्ते बाद उन्हें इसके सक्सेस के बारे में पता चला। उन्होंने कहा, ‘मैं काफी समय से व्यस्त था। फिल्म पूरी करने के बाद मेरी पत्नी और बेटा छुट्टियों की जिद पर लगे हुए थे। इसी दौरान मुझे अपना घर भी शिफ्ट करना था।

रिलीज के दिन हम पहाड़ों में छुट्टियां मना रहे थे। दिन भर दिमागी उथल-पुथल के बाद शाम को मैंने किसी तरह एक पहाड़ी पर चढ़कर फोन के सिग्नल पाए और कुछ मैसेज भेजने और बात करने की कोशिश की। लेकिन इसका कोई खास फायदा नहीं हुआ। लेकिन जब 2 हफ्ते बाद मैं मुंबई लौटा तो फिल्म का रिव्यू देखकर मेरे चेहरे पर मुस्कान थी।’

फिल्म ‘एमएस धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी’ ने सफलता के सारे मुकाम पार कर गई

नीरज की फिल्म रिलीज हुई ‘स्पेशल-26’ अक्षय कुमार, अनुपम खेर और काजल अग्रवाल स्टारर फिल्म ने फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कमाल कर दिया था. इसके बाद नीरज लगातार फिल्में बना रहे हैं। साल 2015 में नीरज ने ‘बेबी’ बनाई। अक्षय कुमार, अनुपम खेर और तापसी पन्नू स्टारर इस फिल्म को भी दर्शकों ने खूब सराहा।

इसके बाद साल 2016 में नीरज ने एक और हिट फिल्म बनाई। यह फिल्म थी भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी पर – ‘एमएस धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी’ . यह फिल्म सफलता के सारे मुकाम पार कर गई।

धोनी के प्रशंसक नहीं नीरज

दिलचस्प बात ये है कि, एमएस धोनी पर फिल्म बनाने के बावजूद, नीरज धोनी के प्रशंसक नहीं हैं। एक पुराने इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, ‘मैं धोनी का प्रशंसक नहीं हूं। मुझे एबी डिविलियर्स और सचिन तेंदुलकर पसंद हैं। लेकिन मैं इन खिलाड़ियों का प्रशंसक भी नहीं हूं। धोनी भी जानते हैं कि मैं उनका फैन नहीं हूं। अगर मैं धोनी का प्रशंसक होता, तो मैं निष्पक्ष तरीके से फिल्म का निर्देशन नहीं कर पाता।’

क्या नीरज ने अक्षय कुमार के करियर को दिया हिट?

एक शो में जब नीरज पांडे से पूछा कि अक्षय कुमार को फिल्म स्पेशल 26 के बाद करियर में काफी सक्सेस मिली, क्या आप ऐसा मानते हैं? इसके जवाब में नीरज कहते हैं कि ऐसा नहीं है। अक्षय कुमार पहले से ही बड़े स्टार हैं और उनके साथ काम करके मजा आता है। हमने कुछ फिल्में साथ में की हैं और काफी बेहतरीन काम किया है। अक्षय के साथ एक कम्फर्ट है जिससे काम करने में आसानी होती है।

सिनेमा के साथ ओटीटी की तुलना करना गलत: नीरज

नीरज ने फिल्मों के अलावा और कुछ वेबसीरीज पर भी बतौर लेखक काम किया है। ओटीटी पर रिलीज हुई वेब सीरीज ‘खाकी द बिहार चैप्टर’ काफी पसंद की गई। आईपीएस अधिकारी अमित लोढ़ा की किताब पर आधारित इस सीरीज को नीरज ने प्रोड्यूस भी किया है। नीरज की मानें तो ओटीटी प्लेटफार्म बहुत अच्छी तरीके से आगे बढ़ रहा है हालांकि उसकी सिनेमा के साथ तुलना करना गलत होगा।

भास्कर से बातचीत के दौरान, नीरज कहते हैं, अब ओटीटी बहुत अच्छी तरीके से आगे बढ़ा है। जब हम सभी अपने घरों में बंद थे उस दौरान वह रातों-रात बड़ा हुआ है। वह एक ऐसा मीडियम बन गया है जो अब हमेशा रहेगा। सिनेमा के साथ इसकी तुलना करना मेरे ख्याल से गलत होता है, अगेन हम लोग कंपैरेटिव्स में जीते हैं। दरअसल हमें वह छोड़ देना चाहिए। दोनों अलग-अलग चीज हैं थिएट्रिकल अपने आप में एक अलग एक्सपीरियंस है।’

उन्होंने आगे कहा, ‘कुछ ऐसी कहानी हैं जिन्हें आप ओटीटी पर नहीं सोच सकते हैं, आप समझते हैं कि यह एक बहुत अच्छी फिल्म है और फिर आप उसे एक फिल्म ही बना सकते हैं। फिर कुछ सोच है जो 7 घंटे 8 घंटे के शोज है कहानी इतनी बड़ी है, इसके बारे में आप जानते हैं कि उसे आप फिल्म में नहीं समेट सकते, तो वह च्वाइस है जिसे आप जैसे चाहे वैसे खेलें।’

नीरज इस बात को लेकर बहुत आश्वस्त हैं कि उन्हें एक अभिनेता से क्या चाहिए: एक्ट्रेस मंजरी फडणवीस

‘द फ्रीलांसर’ एक्ट्रेस मंजरी फडणवीस कहती हैं, ‘अब तक के मेरे अनुभव से मैं ये कह सकती हूं कि नीरज से अच्छा थ्रिलर कोई नहीं बना सकता है। वह इस बात को लेकर बहुत आश्वस्त हैं कि उन्हें एक अभिनेता से क्या चाहिए। वह अपनी कहानी को लेकर बहुत आश्वस्त होते हैं, बेहद प्रोफेशनल हैं।

मेरा सपना था उनके साथ काम करने का और इस प्रोजेक्ट के जरिए मेरा ये सपना पूरा हुआ। सेट पर उन्हें बहुत प्यार और सम्मान मिलता था।’

फिल्मी पार्टियों में जाना पसंद नहीं

नीरज खुद को एक उबाऊ आदमी मानते हैं। उन्होंने कहा, ‘मुझे फिल्मी पार्टियों में जाना पसंद नहीं है। जब मैं फिल्में नहीं बना रहा होता हूं, तो आप मुझे अपने परिवार के साथ समय बिताते, फिल्में देखते या किताबें पढ़ते हुए पाएंगे। मैं एक बोरिंग आदमी हूं। लेकिन हां, मुझे ट्रेवल करना पसंद है और जैसे मौका मिलता है, मैं तुरंत ट्रेवल पर निकल पड़ता हूं।’

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