Divya Aggarwal likes the dialect of Banaras | दिव्या अग्रवाल को पसंद है बनारस की बोली: कहा- शूटिंग करने गई थी, वहां से लौटकर भी उसी लहजे में बात करती रही

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2 घंटे पहलेलेखक: उमेश कुमार उपाध्याय

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साल 2016 की मिस इंडिया रहीं दिव्या अग्रवाल की हालिया हालिया वेब सीरीज ‘टटलूबाज’ एपिक ऑन पर स्ट्रीम हुई। इसमें नरगिस फाखरी, जीशान कादरी, दिव्या अग्रवाल आदि कलाकार दिखाई दिए। वेब सीरीज से लेकर ‘बिग बॉस’, जन्मदिन आदि पर दिव्या ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत की।

पहला ऑडिशन इजाबेल के लिए दिया, पर मिला दिशा का किरदार:

हर बार एक ऐसे प्रोजेक्ट का इंतजार होता है, जिसमें अच्छा काम हो। हम फुल-ब्लोन एक्टिंग करेंगे। एकदम जोरदार होगा। ‘टटलूबाज’ मेरा चौथा वेब शो है। इसके लिए बहुत खुश थी, क्योंकि इसमें स्टार कास्ट के साथ बॉन्डिंग बहुत बढ़िया बन पड़ी थी। यह प्रोजेक्ट मेरे पास आया था।

मजे की बात यह है कि मैंने पहले इजाबेल त्रिपाठी रोल के लिए ऑडिशन दिया था, जिसे बाद में नरगिस फाखरी ने निभाया। चैनल वालों को वह भी काफी पसंद आया। लेकिन उन्होंने कहा कि क्या आप दिशा के रोल के लिए भी ट्राई करेंगी। फिर मैंने दिशा के लिए ऑडिशन दिया। काफी समय तक वह कंफ्यूज थे कि हमें दिव्या अग्रवाल को इजाबेल बनाना चाहिए या दिशा का रोल करवाना चाहिए। आई थिंक, नरगिस फाखरी आईं, तब सुनिश्चित हुआ कि वे इजाबेल का कैरेक्टर अच्छी तरह से निभा पाएंगी और मैं दिशा का।

बनारस का लहजा इतना पसंद आया कि शूटिंग के बाद भी उसी लहजे में बात करती थी:

बनारस में जिस तरह की बोली बोलते हैं, बात करना का जो लहजा है, वह सीखने और उसे रूटीन बनाने में काफी टाइम लगा। पहले तो राइटर की स्क्रिप्ट पढ़कर काफी कुछ सीखा। उसके बाद बनारस गए तो वहां के लोगों से काफी बातचीत करके जाना-समझा। शो शुरू होने से पहले काफी रिहर्सल भी किया। यह काफी चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन जब सीख लिया, तब इतना मजा आ रहा था कि शूटिंग के काफी समय बाद तक लोगों से उसी लहजे में बात कर रही थी। वह लहजा इतना पसंद आ गया था।

बनारस की गलियों में शूटिंग किया, तब वहां बहुत भीड़ होती थी, इसलिए फटाफट शूट करना पड़ा। लेकिन डबिंग में देखा तो पाया कि बहुत अच्छे से सीन निकल कर आए हैं। ऐसे में खुशी हुई कि इतनी बड़ी चुनौती को पार कर पाए।

सेट पर थोड़ा स्टाइल मार लेती थी कि एक्सपर्ट हूं, सीनियर हूं, सो मुझसे सीखो:

इस शो की सबसे खूबसूरत बात यह है कि नरगिस फाखरी फिल्म एक्टर हैं, धीरज धूपर टीवी के बादशाह और मैं हमेशा से ओटीटी में रही हूं। मैंने न फिल्म की है और न ही टीवी सीरियल किया है। इसके बावजूद हम तीनों का कांबिनेशन बहुत अच्छा रहा। नरगिस जी, धीरज जी और यहां तक कि डायरेक्टर विभू की यह पहली वेब सीरीज है। इसके चलते मैं सेट पर थोड़ा स्टाइल मार लेती थी कि मैं एक्सपर्ट हूं, सीनियर हूं, सो मुझसे सीखो। हालांकि उम्र में मैं सबसे छोटी हूं।

हम तीनों ओटीटी, टेलीविजन और फिल्मों की दुनिया पर काफी बातें की। उससे काफी कुछ सीखने को मिला। फिल्मों से आईं नरगिस से फिल्मी अदाएं और धीरज जी से चार-छह पेज का डायलॉग फटाफट बोलना सीखा। कुल मिलाकर मेरे लिए बहुत फायदेमंद रहा।

सीन के बीच में वीडियो कॉल करते हुए महिला आ गई, तब हम खूब हंसे:

बनारस में भरे बाजार में एक ज्वेलरी की दुकान है। वहां पर हम शूट कर रहे थे। शार्ट चल ही रहा था कि बीच से एक मोहतरमा आईं, वह फोन से वीडियो लेते हुए सीधा सेट के अंदर घुस गईं। वे किसी को वीडियो कॉल पर बात करते हुए उससे कह रही थीं कि देखो, देखो, यहां पर शूटिंग चल रही है। कितना बढ़िया है। हम सारे लोग दंग रह गए। उनसे पूछने लगे आप क्या कर रही हैं? वे कहने लगीं कि पहली बार शूटिंग देखे हैं, शूट नहीं करें क्या! पहली बार देखे हैं तो देखने दो। हम सबको खूब हंसी आई। हमने उन्हें रोका नहीं, बल्कि उनको पूरी तरह से वीडियो दिखाने दिया। इस हंसी-मजाक में एक बात देखा कि वहां औरतों में इतना फ्रीडम है कि उनकी जो मर्जी वह करती हैं और किसी को बुरा भी नहीं लगता है। हम सबने कहा कि वाह! इनमें हिम्मत बहुत है। सीन के बीच में आकर सीधा शूट करने लग गईं।

जीवन की सोच:

लोग अपने आप पर बहुत दबाव डालते हैं कि जिंदगी ऐसी ही होनी चाहिए। जिंदगी को अगर समझनी है, तब छोटी-छोटी बातें ही सबसे बड़ी खुशियां देती हैं। दुनिया में कहीं भी चले जाओ, लेकिन मन में जो शांति और और सुकून अपने घर और परिवारों के बीच मिलता है, वह कहीं नहीं मिलता है। जिंदगी का सुख यही है कि जिंदगी में जो लोगों को दोगे, वह वापस दोगुने रेट में आएगा। आप जितना ज्यादा प्यार फैलाओगे, उससे कहीं ज्यादा प्यार आपको मिलेगा।

मुझे ऐसा लगता है कि मेरी जिंदगी दुआओं पर चलती है। लोगों ने मुझे इतनी दुआएं दी हैं, लोगों की दुआओं से बड़ी तेजी से आगे जा रही हूं।

अब ‘बिग बॉस’ को फॉलो नहीं करती। अब तो ऐसा लगता है कि जैसे ‘बिग बॉस’ से कोई संबंध ही नहीं रहा है, क्योंकि जिंदगी बदल गई है। ‘बिग बॉस’ से आने के बाद अपने आपको देखा, तब मुझे पसंद नहीं आया। मुझे ऐसा लगा कि उस शो सिवाय बुराइयों, झगड़ों के कुछ और था ही नहीं। ‘बिग बॉस’ के किसी भी टास्क को देख लो, वह कभी नहीं बोलेंगे कि चलो, आज आप बैठकर एक-दूसरे की अच्छाई पर बात करो कि किसमें क्या बात अच्छी लगती है। वे हमेशा बोलेंगे कि चलो बैठो, इसके बारे में बुराई बोलो, इसको चोर बोलो, इसको निक्कमा बोलो, उसको यह बोलो, उसको वह बोलो। उसमें नेगेटिविटी इतनी हो जाती है कि वहां से निकलने के बाद मैं काफी चिड़चिड़ी रहती थी। मेरे अंदर शांति-सुकून था ही नहीं।

मुझे लगता था कि हर कोई मुझसे बात करते हुए झगड़ा ही कर रहा है। वह बहुत इफेक्ट हुआ था। उसके बाद मैंने यह तय कर लिया था कि ‘बिग बॉस’ के रास्ते तो वापस कभी नहीं जाऊंगी। बस, एक बार शो करना था, कर लिया। मैं बहुत लकी हूं कि ओटीटी का वह शॉर्ट फॉर्म है। मेन चैनल में जाती, तब परेशान हो जाती। अभी अपने आपको देखती हूं, तब ऐसा लगता है कि लाइफ में अच्छा करना है। उसको दो साल हो गए हैं। अब वह चैप्टर खत्म है।

एक-डेढ़ साल तक रहा चिड़चिड़ापन:

वह चिड़चिड़ापन एक-डेढ़ साल तक रहा। एक अजीब-सी बेचैनी, एक अजीब-सा कंप्टीशन… ऐसा लग रहा था कि मैं खुश नहीं हूं। शो जीतकर लोगों का इतना प्यार मिला, लेकिन ऐसा लग रहा था कि कुछ तो अजीब हो रहा है। उसके बाद रियलिटी शो से दूर हुई। अपनी एक्टिंग पर फोकस पर किया, जिस चीज के लिए मैंने इतनी मेहनत की। एक्टिंग ही मेरा पहला और आखिरी प्यार है। आगे बढ़ने के लिए ऑप्च्युनिटी चाहिए, सो यह सब कर लिया। लेकिन 10 साल पहले अगर मुझे कोई ढंग से गाइड कर देता, तब शायद कुछ अलग रास्ता चूज कर लेती। शायद मैं थिएटर जाती।

आज मैं थिएटर जाने के लिए तरसती हूं। लेकिन हमारी फैमिली में कोई इस लाइन में नहीं है। कोई एक्टिंग लाइन में आना चाहे तो उसे बोलूंगी कि आप चाहे जहां से भी हो, आपके लिए नुक्कड़, नाटक, थिएटर आपकी एक्टिंग के लिए बेस्ट चीज है। वहां से जो एक्सपीरियंस मिलेगा, वह बहुत ज्यादा काम आएगा।

जन्मदिन पर गिफ्ट में सीधे पति ही मिल गया:

जी हां, 4 दिसंबर को मेरा बर्थडे होता है। जन्मदिन को लेकर कभी इतना एक्साइटमेंट नहीं रहता था। लेकिन पिछले साल मेरे बर्थडे पर मेरी इंगेजमेंट हुई, सो वह मेरे लिए सबसे ज्यादा स्पेशल है। लाइफ में बर्थडे पर ऐसा गिफ्ट कभी नहीं मिला। बर्थडे पर सीधे पति ही मिल गया। यह सबसे सुंदर बात थी। मेरे बचपन में बड़ी सादगी से घर पर बर्थडे मनाते थे। समोसा, चॉकलेट, केक से भरा प्लेट लेकर घर आती थी, तब उसकी फीलिंग अलग होती थी। आजकल सब कुछ बहुत बदल गया है।

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