धर्मेंद्र, शम्मी कपूर संग दी हिट फिल्में, दिलीप कुमार के साथ काम न करने का आज भी है पछतावा, बोलीं-काश कि वो…

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नई दिल्ली. साल 1952 में बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट अभिनय करियर की शुरुआत करने वाली खूबसूरत एक्ट्रेस आशा पारेख की प्रोफेशन लाइफ जितनी खूबसूरती रही वैसे पर्सनल लाइफ नहीं रही थी. ताउम्र कुंआरी रहीं अपने दौर की ग्लैमरस एक्ट्रेस आशा पारेख को 81 की उम्र में आकर दादा साहब फाल्के अवॉर्ड से सम्मानित किया गया. अपने करियर में उन्हें आज भी एक सुपरस्टार संग काम ना कर पाने का पछतावा है.

आशा पारेख ने अपने एक इंटरव्यू में खुद इस बात का खुलास किया था कि उन्हें इस बात का कोई मलाल नहीं है कि उनकी शादी नहीं हुई और वह ताउम्र कुंआरी रही हैं. उनका मानना है कि शायद उनके भाग्य में यही लिखा था कि उन्हें ऐसे ही रहना है.उन्होंने कहा, ‘शादी करना, मां बनना मुझे अच्छा लगता लेकिन शायद ऐसा नहीं होना था इसलिए मुझे इस बात का कोई मलाल भी नहीं है कि ऐसा नहीं हो सका. आशा पारेख फिल्म डायरेक्टर नासिर हुसैन उस दौर में काफी पसंद किया करती थीं. लेकिन वह पहले से ही शादीशुदा थे और एक्ट्रेस उनका घर नहीं तोड़ना चाहती थीं.

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इस सुपरस्टार संग कभी नहीं कर पाई काम 
आशा पारेख ने अपने करियर में ‘धर्मेंद्र’, ‘देव आनंद’, शम्मी कपूर, सुनील दत्त और जितेंद्र जैसे हर एक बड़े स्टार के साथ काम किया. बतौर लीड एक्ट्रेस उन्होंने शम्मी कपूर के साथ फिल्म दिल देके देखों में काम किया था. लेकिन हिंदी सिनेमा के सुपरस्टार दिलीप कुमार के साथ काम करने का मौका उन्हें कभी नहीं मिला. आज इस उम्र में आकर भी एक्ट्रेस को दिलीप कुमार के साथ काम न कर पाने का पछतावा है. उन्होंने कहा काश कि वो पल आ सकता जब हम साथ में काम कर सकते. इस बात का खुलासा एक्ट्रेस ने खुद दैनिक भास्कर संग बातचीत में किया था. उन्होंने कहा था कि उन्हें अफसोस है कि दिलीप साहब के साथ वह काम नहीं कर सकी और ये दुख उन्हें हमेशा रहेगा.

हर फिल्म में अपने किरदार से जीता फैंस का दिल.

नहीं मिल पाया ये किरदार
यूं तो अपने सिने करियर में आशा पारेश ने एक से बढ़कर एक फिल्मों में काम किया है. कई फिल्मों में तो उनके किरदारों ने लोगों का ऐसा दिल जीता कि आज भी लोग उन्हें भूल नहीं पाए हैं. लेकिन उनके दिल में मदर इंडिया जैसा किरदार न निभा पाने की ख्वाहिश अब बाकी है. वह चाहती थीं कि उन्हें ऐसा भी एक रोल निभाने का चांस मिले जो यादगार बनकर रह जाते हैं, जैसे नरगिस का निभाया मदर इंडिया का किरदार था.

बता दें कि आशा पारेख ने अपने करियर में ‘दो बदन’, ‘दिल देके देखो’, ‘हंसते जख्म’ और ‘मैं तुलसी तेरे आंगन की’ जैसी कई बेहतरीन फिल्मों में काम किया है. 1960 और 1970 के दशक में तो उनका करियर चमक उठा था. ये वो दौर था जब वह हिंदी सिनेमा की सफल अभिनेत्रियों में से एक थीं. साथ ही वह उस समय की सबसे अधिक फीस पाने वाली एक्ट्रेस भी साबित हुई थी. उन्हें हिंदी सिनेमा में अब तक की सबसे प्रभावशाली अभिनेत्रियों में से एक माना जाता है. 1992 में तो उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्म श्री से सम्मानित किया गया था.

Tags: Dharmendra, Entertainment Special

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