Dancer Shiv Thakare Struggle Story (Jhalak Dikhhla Jaa) | कभी डांस सिखाने के 70 रुपए मिलते थे: यूट्यूब पर लर्निंग हासिल की; आज परफॉर्म करने के लाखों रुपए लेते हैं शिव ठाकरे

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8 घंटे पहलेलेखक: किरण जैन

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‘स्टार टॉक्स’ में आपका स्वागत है। आज इस स्पेशल एपिसोड में हम आपको मिलवाएंगे उस पर्सनालिटी से जिन्हें कभी बतौर कोरिओग्राफर महज 70 रूपए मिलते थे, वो भी महीने के 25 दिन कड़ी मेहनत करने के बाद। आज वे इस मुकाम तक पहुंच चुके हैं जहां उन्हें खुद डांस के अलग-अलग फॉर्म्स सीखने और स्टेज पर परफॉर्म करने के लिए लाखों रूपए मिल रहे हैं। हम बात कर रहे हैं रियलिटी शो का जाना-माना चेहरा और डांसर शिव ठाकरे की।

इन दिनों, शिव सेलिब्रिटी बेस्ड डांस रियलिटी शो ‘झलक दिखला जा 11’ में बतौर कंटेस्टेंट नजर आ रहे हैं। अपनी जबरदस्त परफॉरमेंस से उन्होंने अपने फैन्स के साथ-साथ शो के जजेस – मलाइका अरोड़ा, फराह खान और अरशद वारसी का भी दिल जीत लिया।

हालांकि, शिव के लिए डांस की ये जर्नी आसान नहीं रही है।उनकी मानें तो वे काफी जिद्दी हैं जिससे उन्हें ठोकर भी लगी।

शिव खुद को ‘जुगाड़ू’ बुलाना पसंद करते हैं। दरअसल, बहुत ही कम उम्र में पैसे कमाना उनके लिए बहुत जरूरी था। मिडिल क्लास व्यक्ति के लिए खुद की पढ़ाई का खर्च, घर की जिम्मेदारी उठाना आसान नहीं होता। शिव ने यूट्यूब से सीखकर दूसरों को डांस सिखाया, पैसे कमाए और अपने सपने पूरे करने की राह पर निकल पड़े। ‘रोडीज’, ‘बिग बॉस मराठी 2’, ‘बिग बॉस 16’, ‘खतरों के खिलाडी 13’ जैसे रियलिटी शो में पार्टिसिपेट कर चुके शिव ठाकरे की कुल संपत्ति करीब 10 करोड़ रुपए बताई जा रही है।

जब हकीकत का सामना हुआ, तो होश उड़ गए

दैनिक भास्कर से खास बातचीत के दौरान, शिव ने बताया, ‘अपने करियर में ‘झलक’ करना मेरी बकेट लिस्ट में था। ये एक इकलौता शो हैं जहा कंटेस्टेंट अलग-अलग फील्ड से आते हैं। हर कंटेस्टेंट अपनी-अपनी फील्ड में परचम लहराया होता हैं, ऐसे में कॉम्पिटिशन भी आम नहीं होता। शो ज्वाइन करने से पहले मैं अपनी डांसिंग स्किल्स को लेकर बहुत कॉम्फिडेंट था। मुझे लगता था की ये तो मैं बड़ी आसानी से कर लूंगा। अब इतने सालों से डांस करते आ रहा हूं, कोरिओग्राफी की है, इसलिए मैंने बिंदास इस कॉम्पिटिशन में भाग ले लिया।

हालांकि जब हकीकत का सामना हुआ, तो होश उड़ गए। ये जर्नी बिलकुल आसान नहीं थी। डांस सिखाना आसान था लेकिन डांस सीखना बिल्कुल नहीं। दो महीने हो गए शो ज्वाइन किए लेकिन आज भी कई डांस फॉर्म्स के नाम तक नहीं पता। कई फॉर्म्स के नाम तो मैं सही से बोल तक नहीं पाता हूं।’

बॉडी में सूजन तक आ जाती थी

मेरी बॉडी पहलवानों जैसी है। मेरे आस-पास के जो कंटेस्टेंट्स हैं उनकी बॉडी मेरे मुकाबले बहुत फ्लेक्सिबल है। इस शो में टिकने के लिए फिजिकली बहुत मेहनत करनी पड़ी, पहलवान वाली बॉडी को नार्मल करना आसान नहीं। इस दौरान, बहुत काफी चोटें भी आईं। कई बार मेरी बॉडी में सूजन तक आ जाती थी लेकिन मैं हार मानने वालों में से नहीं।

देखिये, हमारे देश में लाखों की तादाद में डांसर्स हैं। मेकर्स ने मुझे बतौर शिव ठाकरे लिया हैं, इन्हें मुझ पर विश्वास हैं। मैं इनका भरोसा नहीं तोड़ना चाहता। मैं कठिन मेहनत कर रहा हूं ताकि मेकर्स, ऑडियंस और जजेस की उम्मीदों पर खरा उतर पाऊं।

अपनी जिद की वजह से ठोकर भी लगी

पिछले कुछ सालों से बैक टु बैक काम कर रहा हूं जिसके लिए मैं हमेशा भगवान का शुक्रगुज़ार रहूंगा। हालांकि, एक वक्त आया जब चाहकर भी मैं डांस नहीं कर पा रहा था, थक गया था। मेरा शरीर साथ नहीं दे रहा था। मेरी पूरी बॉडी काम करना बंद कर गई, चाहकर भी अपने पैर उठा नहीं पाता। कोशिश होती थी कि चेहरे पर ये दर्द ना झलके। लेकिन, इससे मेरे कोरिओग्राफर कंफ्यूज हो जाते, वे मेरी तकलीफ समझ नहीं पाते थे। मैंने गुस्से में भी रिहर्सल किए हैं।

लेकिन फिर हार गया। तब मैंने अपनी मां को अमरावती से मुंबई, मेरे पास बुलाया। उन्होंने मेरी हिम्मत बांधी, मेरा ख्याल रखा। उनके आशीर्वाद से मैं फिर से अपने फॉर्म में आया। दरअसल, मैं काम को लेकर बहुत जिद्दी हूं। इसी जिद की वजह से ठोकर भी लगी। चाहता हूं कि ‘झलक’ के इतिहास में लोग शिव को हमेशा याद रखें।

अरसद वारसी को मेरा डांसिंग स्टाइल बहुत पसंद आया

जज अरसद वारसी को मेरा डांसिंग स्टाइल बहुत पसंद हैं। वे अक्सर कहते रहते हैं – ‘तू जो करता हैं वो पूरी तरह से देसी हैं।’ वे मेरे डांस को गली-गली में रह रहे डांसर्स से तुलना करते हैं। वैसे, तारीफ के साथ-साथ मुझे उनसे डांट भी बहुत पड़ती हैं। दरअसल, सभी की तरह वे भी चाहते हैं कि मैं अपने डांस में सुधार लाऊं। मलाइका अरोड़ा और फराह खान भी मुझे काफी सपोर्ट करती हैं। इन सभी के कमेंट्स को मैं बहुत सीरियसली लेता हूं।

यूट्यूब से सीखता था डांस

पहले मैं खुद को कोरिओग्राफर कहलाना पसंद करता था। लेकिन जब से ‘झलक’ ज्वाइन किया हैं तब से एक असली कोरिओग्राफर क्या होता हैं, ये समझ आया। आज जो कोरिओग्राफर मुझे सिखा रहे हैं, उन्होंने तकरीबन 3 साल के कोर्स किए, सही तरीके से ट्रेनिंग ली जो मैंने नहीं कभी नहीं किया।

मैंने अपने होमटाउन, अमरावती में अपने भाई सतीश ठाकरे के साथ रहकर डांस सीखा था। उन्होंने भी कोई डांस ट्रेनिंग नहीं ली थी। वे यूट्यूब या किसी और का डांस देखकर, उसमे अपनी क्रिएटिविटी लाते और अमरावती के बच्चों को सिखाते थे। मैं उन्हें अपना गुरु मानता हूं।

जो डांस फॉर्म्स मुझे 10 साल पहले सीखना चाहिए था, वो अब सीख रहा हूं

सालों पहले, जब मुंबई आया तब मुझे डांस सीखने का बहुत शौक था। मैं ट्रेनिंग के लिए कुछ डांस क्लासेस के दरवाजे भी खटखटाए। उस वक्त एक घंटा डांस सीखने के लिए तकरीबन 3 हजार रुपए देने होते थे। जाहिर हैं, उतने पैसे से तो मुंबई में 7 दिन के लिए 2 वक्त का खाना हो जाता था।

क्लासेस ज्वाइन करने की बजाय मैंने रेमो डिसूज़ा, टेर्रेंस लुईस जैसे दिग्गज कोरिओग्राफर के यूट्यूब पर वीडियो से सीखना शुरू कर दिया। जो डांस फॉर्म्स मुझे 10 साल पहले सीखना चाहिए था, वो अब सीख रहा हूं।

खुद को ‘जुगाड़ू’ मानता हूं

मैं एक मिडिल क्लास व्यक्ति हूं। छोटी उम्र में ही मैंने कमाने के अलग-अलग रास्ते ढूंढ़ना शुरू कर दिया था। सबसे पहला रास्ता मुझे डांस फील्ड में ही नजर आया। मैंने डांस सिखाना शुरू किया ताकि कुछ पैसे कमा पाऊं। वैसे डांस सिखाने वाले को ‘कोरिओग्राफर’ का दर्जा दिया जाता हैं लेकिन मैं खुद को ‘जुगाड़ू’ मानता हूं।

मेरा डांस सिखाने का टेक्नीक बहुत अच्छा था। मैं लोगों को बहुत प्यार से सिखाता, बच्चे को बच्चा बनकर सिखाता। कोई दूसरे डांसर की तरकीब किसी और पर अपनाता और लोगों को वो पसंद आता था। यहीं वजह है कि मैं खुद को जुगाड़ू बुलाता हूं।

हालांकि, मेरी अपनी पढ़ाई की फीस से लेकर घर के खर्चें तक, इसी जुगाड़ की बदौलत मैं आगे बढ़ पाया। आज सही मायने में मैं डांस सीख रहा हूं।

25 दिन डांस सिखाने के लिए मुझे 70 रुपए मिले थे

पहली बार मुझे 70 रुपए मिले थे एक स्कूल में आयोजित एनुअल फंक्शन के लिए बच्चों को डांस सिखाने के। मैंने आमिर खान की फिल्म ‘तारे जमीन पर’ का फेमस सांग ‘बम बम बोले, मस्ती में डोले’ पर कुछ 30-40 बच्चों को सिखाया था। तकरीबन 25 दिनों तक मैंने इन बच्चों को डांस की ट्रेनिंग दी।

स्कूल के प्रिंसिपल को मेरा काम पसंद आया। उसके बाद उन्होंने मुझे 10 गाने बच्चों को सिखाने के लिए दिए। मेरी फीस भी दुगनी कर दी थी, 70 रुपए की बजाए 150 रुपए मिलने लगे। एक वक्त ऐसा भी आया जहां इसी स्कूल के एडमिनिस्ट्रेशन टीम ने मुझे एक गाना सिखाने के 1000 रुपए दिए। ये 70 से 1000 रुपए की जर्नी हमेशा यादगार रहेंगी।

वैसे, अब वक्त बिलकुल पलट गया है। पहले डांस सिखाने के पैसे मिलते थे और आज खुद डांस सीखने और परफॉर्म करने के पैसे मिल रहे हैं। (मुस्कुराते हुए)

गांव में टैलेंट एकेडमी खोलने की है ख्वाहिश

मेरे गांव में मुझसे भी ज्यादा टैलेंटेड बच्चे हैं। लेकिन, उन्हें मौका नहीं मिलता अपना टैलेंट दिखाने का, खास तौर पर बड़े प्लेटफार्म पर। कई बार उन्हें सही समय पर सही मार्गदर्शन नहीं मिलता। कई बच्चे सपने लेकर मुंबई आते तो हैं, लेकिन यदि वे किसी धोखे का शिकार हो जाएं तो शर्म के मारे गांव लौट भी नहीं पाते।

कोई जिम्मेदारी के चलते, अपने सपनों से दूर हो जाते हैं। भविष्य में, मैं आने वाली पीढ़ी के लिए अमरावती में एक अकादमी बनाना चाहूंगा। जिस तरह से मैंने अमरावती से मुंबई आकर अपना सपना पूरा किया, उसी तरह मैं अब अपने गांव के इन टैलेंटेड बच्चों को उनके सपनों के करीब लाना चाहता हूं।

शिव ठाकरे की नेट वर्थ

रिपोर्ट्स के मुताबिक, शिव ठाकरे ‘बिग बॉस 16’ से हर हफ्ते 5 लाख रुपये चार्ज कर रहे थे। उन्होंने इस रियलिटी शो से करीब 1 करोड़ रुपये कमाए हैं। रियलिटी शो ‘खतरों के खिलाड़ी’ के लिए शिव को 7-8 लाख रुपए प्रति एपिसोड मिलते थे। ‘झलक दिखला जा’ की बात की जाए, तो शिव प्रति एपिसोड तकरीबन 8 लाख रुपए चार्ज कर रहे हैं। उनकी कुल संपत्ति करीब 10 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

शिव ठाकरे का कार कलेक्शन

‘बिग बॉस’ के घर से बाहर आने के बाद शिव ने अपनी जिंदगी की पहली कार खरीदी थी। उन्होंने 30 लाख रुपये की एसयूवी खरीदी। इस कार से पहले शिव ने दो पुरानी कारें खरीदी थीं।

एक्टिंग के अलावा शुरू किया अपना बिजनेस

शिव ठाकरे ने मुंबई में रेस्तरां बिजनेस में भी कदम रखा। उन्होंने ‘ठाकरे-चाय एंड स्नैक’ नाम से अपना स्नैक जॉइंट खोला है और कहा है कि वह इस रेस्टोरेंट को फ्रेंचाइजी के जरिए कई जगहों पर खोलना चाहते हैं। वह मुंबई, पुणे और बाद में अपने होम टाउन अमरावती में भी लॉन्च करने जा रहे हैं।

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