कोठे में जन्मी खूबसूरत सिंगर, यहीं से सीखा संगीत और बनीं सुरों की मलिका

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मुंबई. आज से 100 साल पहले के भारत में मनोरंजन के साधन दूसरे थे. अमीर लोगों के लिए नाच और गाना देखने का कोठा एकमात्र साधन हुआ करता था. लेकिन धीरे-धीरे कोठों की प्रसिद्धि घटने लगी और फिल्मों ने मनोरंजन की जिम्मेदारी उठा ली. समय बीता और साधन बदले फिल्मों का माध्यम सशक्त होने लगा. फिर फिल्मों में कहानी के साथ गाना और नाच की भी अहम भूमिका होने लगी. 1930 के दशक में भारत में क्रांति की आग जल रही थी, ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ जंग छिड़ी थी. इसी दौर में फिल्मों का व्यापार भी अपने शवाब पर आने लगा. एक महिला संगीतकार ने भी फिल्मी दुनिया में अपनी एंट्री ली. ये संगीतकार बला की खूबसूरत थी और बचपन से ही कोठे में संगीत की तालीम ले चुकी थीं. कोठे में ही इनका जन्म हुआ था. इस महिला संगीतकार ने अपनी कला का ऐसा बीज बोया जो आज 100 साल भी हरभरा पेड़ बनकर लहरा रहा है. बॉलीवुड की इस पहली महिला संगीतकार का नाती आज सुपरस्टार है. अब तक तो आप जान ही गए होंगे कि हम बात कर रहे हैं ‘जद्दनबाई’ (Jaddanbai) की.

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