Ayodhya Ram Mandir Dispute; Javed Akhtar Interview | Bollywood News | जावेद अख्तर बोले- मंदिर पर हंगामा करने की जरूरत नहीं: कहा- सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करना चाहिए, जश्न मनाने में बुराई नहीं

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7 घंटे पहलेलेखक: रोशनी शिंपी

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हिंदी फिल्मों के वेटरन राइटर जावेद अख्तर का कहना है कि अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण से किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उनका कहना है कि जब सुप्रीम कोर्ट ने ही फैसला दिया है कि अयोध्या में मंदिर बनना चाहिए, फिर इस पर हंगामा करने का कोई मतलब नहीं है। यह दुनिया का सबसे बड़ा उत्सव है। जश्न मनाने में कोई बुराई नहीं है।

बता दें कि जावेद अख्तर हाल ही में महाराष्ट्र के औरंगाबाद में हुए अजंता-एलोरा फिल्म फेस्टिवल में पहुंचे थे। वहां उन्होंने राम मंदिर, उर्दू भाषा और अजंता-एलोरा की गुफाओं के बारे में काफी बातें कीं।जावेद अख्तर ने दैनिक भास्कर के साथ इंटरव्यू में कुछ मुख्य बिंदुओं पर बात की।

उर्दू को धर्मनिरपेक्ष भाषा माना जाता है। आज की स्थिति के बारे में आप क्या सोचते हैं?
जवाब-
उर्दू कभी भी मौलवियों की भाषा नहीं थी।1798 में जब कुरान का अनुवाद किया गया तो मौलवियों ने इसके खिलाफ फतवा जारी कर दिया। उन्होंने इसे घटिया भाषा तक करार दे दिया। मौलवियों ने आपत्ति जताई कि पवित्र कुरान को ऐसी भाषा कैसे दी जा सकती है, लेकिन यह शुरू से ही व्यापक विचारधारा वाले, धर्मनिरपेक्ष और प्रगतिशील लोगों की भाषा है।

यह भाषा पंजाब, दिल्ली, बिहार, उत्तर प्रदेश में बोली और लिखी जाती है। यह एक ऐसी भाषा है जो पहले दिन से ही प्राचीन रीति-रिवाजों का खंडन करती है, लेकिन कुछ लोग मुसलमानों से नफरत करते हैं, इसलिए इस भाषा को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं। यह किसी धर्म की नहीं बल्कि क्षेत्र की भाषा है।

जावेद अख्तर ने अपने करियर में कई बड़ी फिल्मों का लेखन किया है। उनकी और सलीम खान की जोड़ी ने बॉलीवुड को एक से बढ़कर एक फिल्में दी हैं।

जावेद अख्तर ने अपने करियर में कई बड़ी फिल्मों का लेखन किया है। उनकी और सलीम खान की जोड़ी ने बॉलीवुड को एक से बढ़कर एक फिल्में दी हैं।

ऐसा क्यों है कि कला जगत के लोग विशेषकर अधिकांश शायर शराबी होते हैं?
जवाब- अधिकांश शायर लोग शराबी हो सकते हैं, लेकिन मैं एक बूंद भी नहीं पीता। बहुत से लोग बिना शायर हुए ही शराब पीते हैं। यह एक गंभीर समस्या है। गांवों और शहरों में शराब की वजह से बहुत से लोग मर जाते हैं। क्या ये सभी कवि हैं? ऐसा कुछ भी नहीं है।

जावेद अख्तर को 2007 में भारत सरकार की तरफ से पद्म भूषण मिल चुका है।

जावेद अख्तर को 2007 में भारत सरकार की तरफ से पद्म भूषण मिल चुका है।

आपके बेटे फरहान एक्टर, राइटर और डायरेक्टर भी हैं। उनकी खूबियां और कमियां बताइए?
जवाब-
फरहान बहुत प्रतिभाशाली व्यक्ति हैं। मैं उसकी सफलता से बहुत खुश हूं। अच्छा लिखते हैं, अच्छा निर्देशन करते हैं। एक्टिंग भी अच्छी है। अब तक उन्होंने जो कुछ भी किया है, अच्छा किया है। उन्होंने फिल्म को चलाने के लिए कोई घटिया चीजें नहीं कीं। उन्होंने गंदे गाने और डायलॉग नहीं लिखे।

जिस्म अजंता की मूरत जैसा कोई..क्या आपने ये पंक्तियां अजंता की गुफाएं देखकर लिखीं?
जवाब- जब मैंने ये लाइनें लिखीं, तब तक अजंता-एलोरा की गुफाएं नहीं देखी थीं। ​​​​​​ये लाइनें मैंने तस्वीरें देखकर लिखी हैं। मैंने पहली बार एलोरा की गुफाओं को देखा और अवाक रह गया। ये मूर्तियां 600 सालों से कई पीढ़ियों द्वारा बनाई गई हैं।

कैसा जुनून होगा उन लोगों में, जिन्होंने इतनी असाधारण सुंदरता को मूर्त रूप दिया। मैं इस बात से आश्चर्यचकित हूं कि उन्होंने किस तरह से उन मूर्तियों को आकार दिया है। अब मैं अजंता की मूर्तियां भी देखना चाहूंगा।

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