चुनाव नतीजों के बाद सोमवार को गिरेगा शेयर बाजार या आएगी तेजी? जानें 2003 से अबतक के आंकड़े

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एग्जिट पोल (Exit Poll) के नतीजों बाद शुक्रवार 1 दिसंबर को शेयर बाजार (Stock Market) का जोश हाई था। निफ्टी (Nifty) ने 20,291 का अपना नया ऑलटाइम हाई छुआ। अब सबको 3 दिसंबर को चुनाव नतीजों का इंतजार है। कौन जीता, कौन हारा? इसकी असली तस्वीर काउंटिंग से ही पता चल जाएगी। लेकिन इस बीच शेयर बाजार के निवेशकों की एक और चिंता है। वो यह है कि काउंटिंग के अगले दिन यानी सोमवार 4 दिसंबर को शेयर बाजार में क्या होगा? बाजार इस दिन गिरेगा, या ऊपर जाएगा? अभी एग्जिट पोल देखकर ऐसा लग रहा है कि 2 राज्यों- छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में कांग्रेस को बढ़त है। वहीं राजस्थान और मध्य प्रदेश में बीजेपी आगे दिख रही है। जबकि मिजोरम में एक बार फिर क्षेत्रीय पार्टियां ही हावी रहने वाली है।

फिलहाल तो बीजेपी के खाते में 2 राज्य जाता देख शेयर बाजार खुश दिख रहा है। आज की तेजी से यह साफ पता चलता है लेकिन अगर सोमवार को नतीजे बदल गए, फिर क्या होगा? इसलिए आज हम आपके सामने पिछले 20 सालों यानी 4 चुनावों का डेटा लेकर आए हैं। इससे हम जानेंगे कि आखिर 2003, 2008, 2013 और 2018 में इन पांचों राज्यों के चुनाव के बाद शेयर बाजार का कैसा रिस्पॉन्स रहा था?

2018 का विधानसभा चुना

साल 2018 में भी इन्हीं पांचों राज्यों यानी- मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, तेलंगाना और मिजोरम का एक साथ चुनाव हुआ था। वोटों की गिनती 11 दिसंबर 2018 को हुई थी। इस चुनाव में कांग्रेस ने काफी शानदार प्रदर्शन किया था और तीन राज्यों- छत्तीसगढ़, राजस्थान और एमपी में बीजेपी को हराकर सरकार बनाई थी। तेलंगाना में बीआरएस की फिर से सरकार बनी थी। वहीं मिजोरम में कांग्रेस को हराकर मिजो नेशनल फ्रंट (MNF) जीती थी।

लोकसभा से ठीक पहले तीन बड़े राज्यों में बीजेपी की हार को तब इसके लिए एक बड़ा झटका माना गया था। बीजेपी की हार को देखते हुए सेंसेक्स उस दिन इंट्राडे में करीब 500 अंक तक गिर गया था। लेकिन शाम होते-होते यह इससे रिकवर कर गया और अंत में 190 अंक ऊपर जाकर 35,150 अंक पर बंद हुआ। निफ्टी में भी 60 अंकों की तेजी रही और यह 10,549 के स्तर पर बंद हुआ।

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2013 के विधानसभा चुनाव

साल 2013 में तेलंगाना का गठन नहीं हुआ था। लेकिन मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और मिजोरम के साथ तब केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली का चुनाव हुआ करता था। इन पांच में 4 राज्य के वोटों की गिनती 8 दिसंबर 2013 को हुई थी। जबकि मिजोरम में एक दिन बाद 9 दिसंबर को मतगणना हुई थी। उस साल 8 दिसंबर को रविवार था। बीजेपी ने तीनों बड़े राज्यों- एमपी, छत्तीसगढ़, राजस्थान में अपनी सरकार बचाई थी। जबकि दिल्ली में यह 31 सीट लाकर सबसे बड़ी पार्टी बनी थी और शीला दीक्षित की अगुआई वाली कांग्रेस 15 सालों बाद चुनाव हारी थीं। इन चुनावों ने 2014 लोकसभा चुनाव के लिए बीजेपी का मोमेंटम सेट करने में मदद की थी। बीजेपी के दमदार प्रदर्शन के बाद अगले दिन सोमवार 9 दिसंबर को शेयर बाजार में शानदार तेजी रही। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ने उस दिन अपना नया ऑल-टाईम हाई छुआ था। सेंसेक्स करीब 350 अंक चढ़कर बंद हुआ था।

2008 के विधानसभा चुनाव

साल 2008 में भी इन्हीं पांचों राज्यों- एमपी, छत्तीसगढ़, राजस्थान, दिल्ली और मिजोरम में एक साथ चुनाव हुआ था। इस चुनाव में कुछ भी उलटफेर जैसा नहीं हुआ था। एमपी, छत्तीसगढ़ में बीजेपी की सरकार फिर से आई थी। वहीं दिल्ली और मिजोरम में कांग्रेस ने दोबारा सरकार बनाई थी। जबकि राजस्थान में सरकार बदलने की परंपरा कायम रही थी और वसुंधरा राजे से हटकल राज्य में अशोक गहलोत की सरकार बनी थी। उस समय वोटों की गिनती सोमवार 8 दिसंबर 2008 को हुई थी। सेंसेक्स इस दिन 197 अंक बढ़कर 9,162 पर बंद हुआ था। जबकि निफ्टी करीब 2.5 फीसदी की तेजी के साथ 2,784 के स्तर पर बंद हुआ था।

2003 के विधानसभा चुनाव

साल 2003 में बीजेपी ने एमपी, छत्तीसगढ़ और राजस्थान, तीनों राज्यों में कांग्रेस को हराकर बड़ी जीत हासिल की थी। वहीं कांग्रेस दिल्ली में अपनी सरकार बचाने में कामयाब रही थी। उस साल गुरुवार 4 दिसंबर को नतीजे आए थे। नतीजों के बाद सेंसेक्स 0.08%, जबकि निफ्टी 0.28% बढ़कर बंद हुआ था। यानी कुल मिलाकर पिछले 20 सालों से, लोकसभा का सेमीफाइनल कहे जाने वाले इन विधानसभा चुनावों के नतीजे आने के बाद शेयर बाजार किसी ने किसी कारण से ऊपर ही गया है। अब देखना होगा कि 4 दिसंबर 2023 को बी बाजार में यहीं ट्रेंड बरकरार रहेगा, पिछले 20 सालों का रिकॉर्ड टूट जाएगा?

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